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आज की पोस्ट आप सभी के लिए बहुत लाभदायक रहेगी🙏

आज का हमारा विषय रहेगा न्याय । आईए इस पर चर्चा करते हैं




                             न्याय

न्याय शब्द की उत्पति (Origin of the the word Justice) 

न्याय का अंग्रेजी शब्द Justice लैटिन शब्द jus से निकला है, जिसका अर्थ है बन्धन या बांधना (Bond or tie) । 

न्याय व्यक्ति को समाज में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करने तथा शांतिपूर्वक जीवन जीने में सहायता करता है। 

 

न्याय का अर्थ  

न्याय उस धारणा को कहते हैं जो किसी समाज में उचित व्यक्तिगत और सामाजिक हितों में सामंजस्य पैदा करता हो तथा जो निष्पक्ष, तथा तरक संगत है। 

न्याय के मूल तत्व 

Basic Elements Of Justice 

1) सत्य (Truth) 

2) कानून के समक्ष समानता 

3) स्वंत्रता 

4) मौलिक अधिकारों की आवश्यक पूर्ति 

5) निष्पक्षता। 

न्याय के 4 पक्ष है मुख्य जिनका वर्णन इस तरह से है 

 

1) न्याय का सामाजिक पक्ष 

सामाजिक न्याय की भावना इस बात पर आधारित है कि समाज सभी सदस्य समान हैं और समाज के कमजोर वर्ग को राज्य द्वारा संरक्षण मिलना चाहिए ताकि वह दूसरों के समान रह सकें और उनका शोषण न हो। सामाजिक समानता ही सामाजिक न्याय का आधार है। 

 

2)न्याय का राजनीतिक पक्ष 

 

न्याय के राजनीतिक पक्ष से अभिप्राय है कि 

 शासन की शक्ति कुछ व्यक्तियों या किसी वर्ग विशेष ने हाथों में केन्द्रित न होकर समस्त जनता के पास होनी चाहिए और जनता के प्रत्यक्ष रूप से चुने हुए प्रतिनिधि ही उनका प्रयोग करें। 

 

नागरिकों को अपने अधिकारो के लिए बोलने भाषण व अभिव्यक्ति आदि की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए 

 

3)न्याय का वैधानिक पक्ष 

 

न्याय का कानूनी पक्ष ही वास्तव में असल न्याय है। अर्थात् न्याय वही है जो कानून के अनुसार है। राज्य के द्वारा लोगों को कानूनी न्याय ही दिया जाता है और लोग उन न्यायालयों के माध्यम से इसी न्याय की मांग करते हैं। जब दो व्यक्तियों या पक्षों में कोई विवाद उत्पन्न हो चाहे सम्पत्ति के सम्बन्ध में या लड़ाई-झगड़े के कारण, या फौजदारी विवाद हो, तो उसका निर्णय न्यायालयों द्वारा बात प्रचलित कानूनों के अनुसार किया जाता है। 

4)न्याय का आर्थिक पक्ष 

 

आर्थिक न्याय का अर्थ है-आर्थिक असमानताओं की अनुपस्थिति और आर्थिक शोषण से मुक्ति। इसका अर्थ ये भी है कि बच्चों, स्त्रियों, बूढ़ों और अपाहिजों को कोई ऐसा काम करने के लिए बाध्य न होना पड़े, जो वे न कर सकते हों या करना न चाहते हों। इस प्रकार आर्थिक न्याय, आर्थिक समानता तथा आर्थिक स्वतंत्रता का नाम है। एम. सी. शीतलवाद (Shri M.C. Seetalwad) का कहना है कि “आर्थिक न्याय का अर्थ नागरिक को धन करने व जीवन में उसका प्रयोग करने के समान अवसर प्रदान करने से है।


मुझे पूर्ण उम्मीद है कि ऊपर दी गई जानकारी आपके लिए लाभप्रद रही होगी।

हम आपके लिए हमेशा सबसे अच्छा लाने के लिए प्रयासरत रहेंगे🙏

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