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आज का हमारा विषय प्राचीन भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय सिंधु घाटी सभ्यता है। हमने इस पोस्ट में सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह तैयार किया है जोकि बार-बार परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
* हड़प्पा सभ्यता को विश्व की सबसे पुरानी व विकसित सभ्यता माना जाता है। इसे सिंधु नदी के तट पर स्तिथ होने के कारण सिंधु घाटी सभ्यता भी कहते हैं।
C -14 रेडियोकार्बन की वैज्ञानिक विश्लेषण विधि द्वारा इस सभ्यता की सर्वमान्य अतिथि 2500-1750 ईसवी पूर्व मानी गई है।
हड़प्पा सभ्यता की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी जी ने हड़प्पा नामक स्थान पर जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में अवस्थित है ,1921 ईस्वी में की थी।
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ईस्वी में राखल दास बनर्जी द्वारा की गई थी मोहनजोदड़ो वर्तमान में पाकिस्तान में सिंधु नदी के दाएं और स्थित है।
भारत में सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा उत्खनन स्थल हरियाणा जिले के राखीगढ़ी को माना जाता है। इसके पश्चात मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा सभ्यता का नाम आता है।
सिंधु घाटी सभ्यता की इंटे एक निश्चित अनुपात में बनाई जाती थी इन्हें आग में पका कर तैयार किया जाता था इनका लंबाई चौड़ाई मोटाई का अनुपात क्रमशः 4:2:1 होता था
सिंधु घाटी सभ्यता में खुदाई के दौरान एक विशाल स्नानागार मिला है । इसका प्रयोग अनुष्ठान कार्यों के लिए किया जाता था।
सिंधु घाटी सभ्यता की प्रमुख खाद्यान्न फसलें गेहूं और जौ थी ।साथ ही चावल की खेती के प्रमाण सिर्फ लोथल एवं रंगपुर से प्राप्त हुए हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि चित्रात्मक थी जो कि दाएं से बाएं क्यों लिखी जाती थी। इसे आज तक नहीं पढ़ा गया है।
सिंधु घाटी सभ्यता की बंदरगाह लोथल वर्तमान में गुजरात में स्थित है। इसे लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो भी कहते हैं।
कालीबंगा जो कि राजस्थान में स्थित है से जूते हुए खेतों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं यह घग्गर नदी के तट पर स्थित था।
भारत में राखीगढ़ी के बाद धोलावीरा को हड़प्पा कालीन सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती माना जाता है ।यह गुजरात के कच्छ में अवस्थित है।
हड़प्पा सभ्यता 1000 साल तक रही। इसके पतन से संबंधित विद्वानों में बहुत से मतभेद है। इसके प्रमुख कारणों में बाढ़, सूखा, आग लगना, भूकंप इत्यादि को माना जाता है।
आज की पोस्ट में बस इतना ही जल्द ही लौटेंगे एक नए विषय के साथ जुड़े रहे हमारी वेबसाइट के साथ धन्यवाद।🙏
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